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About Shreemant Dagdusheth Ganpati

Shrimant Dagdusheth Halwai Ganpati: A Divine Symbol of Faith and Devotion

Shrimant Dagdusheth Halwai Ganpati is one of the most revered deities, deeply cherished by devotees. This magnificent temple stands as a symbol of pride and devotion for the city of Pune. Every year, thousands of devotees from across India and around the world visit this sacred place to seek the blessings of Lord Ganesha.

Beyond being a place of worship, the Shrimant Dagdusheth Halwai Temple plays a vital role in social welfare and cultural activities through the Shrimant Dagdusheth Halwai Sarvajanik Ganpati Trust. The temple has a rich history that reflects unwavering faith and dedication.

The idol of Lord Ganesha was first consecrated by Shri Dagdusheth Halwai and his wife, Lakshmibai, following the tragic loss of their only son to a plague epidemic. What began as a personal act of devotion soon turned into a grand festival, embraced not just by their family but by the entire community. Over the years, this celebration has grown into a significant cultural and religious event, uniting thousands of devotees in faith and devotion.


श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति: श्रद्धा और भक्ति का दिव्य प्रतीक

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति भक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय देवता हैं। यह भव्य मंदिर पुणे शहर के गौरव और आस्था का प्रतीक है। हर साल, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने यहाँ आते हैं।

मंदिर केवल उपासना का स्थल नहीं है, बल्कि श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट के माध्यम से सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसका गौरवशाली इतिहास सच्ची श्रद्धा और निष्ठा को दर्शाता है।

भगवान गणेश की मूर्ति का स्थापना श्री दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने की थी, जब उन्होंने प्लेग महामारी में अपने इकलौते पुत्र को खो दिया था। उनकी भक्ति का यह व्यक्तिगत रूप जल्द ही एक भव्य उत्सव में परिवर्तित हो गया, जिसे उनके परिवार के साथ-साथ पूरे समुदाय ने अपनाया। वर्षों से, यह गणपति उत्सव एक भव्य सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन बन गया है, जो हजारों श्रद्धालुओं को आस्था और भक्ति के सूत्र में बांधता है।