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Maa Skandamata – The Divine Mother of Wisdom and Protection

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Maa Skandamata, worshiped on the fifth day of Navratri, is the mother of Lord Kartikeya. She symbolizes maternal love, wisdom, and courage. Riding a lion with her child in her lap, she blesses devotees with prosperity, peace, and spiritual enlightenment. Her worship removes negativity and bestows divine grace.

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Shivam Gangwar 8 min
Apr 03, 2025

Maa Skandamata – The Goddess of Motherhood and Devotion

Navratri, a festival of divine energy and devotion, celebrates the nine forms of Goddess Durga. The fifth day of Navratri is dedicated to Maa Skandamata, the mother of Lord Skanda (Kartikeya), the commander of the divine army. She is a symbol of motherly love, courage, and compassion, guiding her devotees toward wisdom and salvation.

Who is Maa Skandamata?

Maa Skandamata is the fifth form of Goddess Durga and is revered as the mother of Lord Kartikeya (Skanda), the warrior deity who leads the celestial forces. The word “Skanda” refers to Lord Kartikeya, and “Mata” means mother, hence she is known as Skandamata.

She is depicted as a divine mother seated on a lion, holding her son Kartikeya on her lap. She has four hands, with two holding lotus flowers, one in Abhaya Mudra (gesture of blessing), and the fourth hand carrying her child. Her radiant presence signifies peace, nourishment, and spiritual enlightenment.

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Symbolism and Importance

Maa Skandamata embodies the energy of motherhood, selfless love, and nurturing care. Worshiping her blesses devotees with:

  • Maternal protection – She safeguards her children from harm and negativity.
  • Wisdom and spiritual growth – Her presence elevates the mind and soul.
  • Strength and courage – She instills bravery and resilience in her devotees.
  • Divine grace and prosperity – Her blessings remove obstacles and bestow success.

Maa Skandamata and the Vishuddha Chakra

Maa Skandamata is associated with the Vishuddha Chakra (Throat Chakra), which represents communication, truth, and purity. Worshiping her helps in gaining clarity, confidence, and the power of truthful expression.

The Legend of Maa Skandamata

According to Hindu mythology, when demons became invincible and threatened the gods, Lord Shiva and Goddess Parvati’s son, Kartikeya, was chosen to lead the divine forces. He grew into a mighty warrior and ultimately defeated the demon Tarakasura, restoring peace in the heavens. As the mother of this great warrior, Maa Skandamata represents nurturing strength and divine protection.

Significance of Worshiping Maa Skandamata

Devotees who worship Maa Skandamata with devotion receive her divine grace, which helps in:

  • Attaining peace and prosperity.
  • Overcoming challenges and hardships.
  • Strengthening motherly bonds and family ties.
  • Attaining spiritual wisdom and enlightenment.

How to Worship Maa Skandamata

On the fifth day of Navratri, devotees perform special rituals to seek Maa Skandamata’s blessings:

  • Early morning prayers and meditation – Begin the day with gratitude and devotion.
  • Offering flowers and fruits – White flowers and bananas are dear to her.
  • Reciting mantras – Chanting “Om Devi Skandamatayai Namah” invokes her divine blessings.
  • Performing Aarti and Bhajan – Singing hymns in her praise enhances positivity.
  • Charity and service – Helping the needy pleases the goddess and attracts good karma.

Spiritual Benefits of Worshiping Maa Skandamata

  • Blessings of good health and intelligence.
  • Removal of sins and past karmic burdens.
  • Strength to overcome challenges with faith and courage.
  • Pathway to higher consciousness and liberation.

Conclusion

Maa Skandamata, the divine mother, is the ultimate source of love, protection, and wisdom. Her worship on the fifth day of Navratri helps devotees experience peace, strength, and spiritual fulfillment. By surrendering to her grace, one can achieve divine knowledge, success, and salvation.

Let us bow to Maa Skandamata and seek her blessings for a life filled with courage, devotion, and prosperity.

Jai Maa Skandamata!


मां स्कंदमाता – मातृत्व और भक्ति की देवी

नवरात्रि, जो देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित है, भक्तों के लिए शक्ति और आध्यात्मिकता का पर्व है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं। वे मातृत्व, साहस और करुणा की प्रतीक हैं और अपने भक्तों को ज्ञान और मोक्ष की ओर ले जाती हैं।

मां स्कंदमाता कौन हैं?

मां स्कंदमाता दुर्गा के पांचवें स्वरूप के रूप में पूजी जाती हैं। उन्हें भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण स्कंदमाता कहा जाता है।

उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और मातृत्व से भरा हुआ है। वे सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनकी चार भुजाएं होती हैं। दो हाथों में कमल पुष्प, एक हाथ अभय मुद्रा (आशीर्वाद) में होता है और एक हाथ में उनका पुत्र कार्तिकेय विराजमान होता है। उनका तेजोमय स्वरूप शांति, पोषण और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।

मां स्कंदमाता का प्रतीकात्मक महत्व

मां स्कंदमाता मातृत्व, निस्वार्थ प्रेम और देखभाल की शक्ति को दर्शाती हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • मातृ संरक्षण – वे अपने भक्तों को हर संकट और नकारात्मकता से बचाती हैं।
  • बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति – उनकी कृपा से ज्ञान और आत्मबोध प्राप्त होता है।
  • साहस और शक्ति – वे अपने भक्तों को दृढ़ संकल्प और शक्ति प्रदान करती हैं।
  • समृद्धि और सफलता – उनकी कृपा से जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।

मां स्कंदमाता और विशुद्धि चक्र

मां स्कंदमाता का संबंध विशुद्धि चक्र (गले का चक्र) से है, जो संचार, सत्य और पवित्रता का प्रतीक है। उनकी आराधना करने से स्पष्ट विचार, आत्मविश्वास और सत्य बोलने की शक्ति मिलती है।

मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब असुरों ने देवताओं को पराजित कर दिया, तब भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को देवताओं की सेना का सेनापति बनाया गया। वे एक महान योद्धा बने और तारकासुर नामक राक्षस का संहार किया। मां स्कंदमाता इसी योद्धा पुत्र की माता हैं, जो सृजन, पालन और रक्षा का प्रतीक हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व

मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों को दिव्य कृपा प्राप्त होती है, जिससे:

  • शांति और समृद्धि मिलती है।
  • जीवन की कठिनाइयों को पार करने की शक्ति मिलती है।
  • माता-पिता और संतान के रिश्ते में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है।
  • आध्यात्मिक ज्ञान और उन्नति प्राप्त होती है।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की विशेष पूजा की जाती है:

  • प्रातः काल स्नान और ध्यान – शुद्ध मन से माता का स्मरण करें।
  • फूल और फल अर्पित करें – मां को सफेद फूल और केले विशेष रूप से प्रिय हैं।
  • मंत्र जाप करें“ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जाप करें।
  • आरती और भजन करें – माता की महिमा गाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • दान और सेवा करें – गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यदायी होता है।

मां स्कंदमाता की कृपा के लाभ

  • स्वास्थ्य और बुद्धिमत्ता का वरदान प्राप्त होता है।
  • पिछले जन्मों के पाप और नकारात्मक कर्मों का नाश होता है।
  • विश्वास और साहस से जीवन की कठिनाइयों को पार करने की शक्ति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।

निष्कर्ष

मां स्कंदमाता ममता, रक्षा और ज्ञान की देवी हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। वे हमें सिखाती हैं कि मातृत्व केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति भी है

आइए, मां स्कंदमाता की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा करें।

जय माता दी!


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