Maa Chandraghanta, worshipped on the third day of Navratri, symbolizes courage, peace, and divine protection. Adorned with a crescent moon on her forehead, she rides a lion, carrying weapons to destroy evil while blessing her devotees with tranquility and prosperity. Her grace removes fear and negativity, empowering devotees with strength and spiritual wisdom.
Navratri, the festival dedicated to Goddess Durga, celebrates her nine divine forms. The third day of Navratri is devoted to Maa Chandraghanta, a powerful yet compassionate goddess who represents courage, grace, and divine protection. She is known to bestow her devotees with strength, peace, and prosperity while eliminating negativity and fear.
Maa Chandraghanta is the third manifestation of Goddess Durga. Her name comes from the half-moon (Chandra) shaped like a bell (Ghanta) on her forehead. She signifies courage and serenity, balancing aggression with peace. While her fierce form destroys evil forces, her calm demeanor blesses devotees with harmony and happiness.
She is the divine consort of Lord Shiva, and after their marriage, she adorned her forehead with the crescent moon, earning her the name Chandraghanta. Her form teaches us that with courage and grace, we can overcome life’s challenges while maintaining inner peace.
Maa Chandraghanta’s divine form is awe-inspiring:
Maa Chandraghanta is associated with the Manipura Chakra (Solar Plexus Chakra), which governs confidence, willpower, and personal strength. Worshiping her activates this chakra, helping devotees overcome fear, self-doubt, and negativity. She blesses them with courage, clarity, and emotional balance.
On the third day of Navratri, devotees perform the following rituals to seek Maa Chandraghanta’s blessings:
“Om Devi Chandraghantayai Namah”
After Goddess Parvati’s intense penance, Lord Shiva agreed to marry her. When he arrived at the wedding venue with his followers (Ganas), he appeared in a terrifying form—covered in ashes, with a garland of skulls and wild creatures accompanying him. Seeing this, Parvati transformed into Maa Chandraghanta, radiating divine energy and calming the situation. Her soothing yet commanding presence reassured everyone, ensuring a peaceful wedding.
This story highlights how courage and grace can transform even the most daunting situations into harmonious ones.
Maa Chandraghanta governs the planet Venus (Shukra), which influences love, beauty, and harmony. Worshiping her can remove planetary obstacles, bring success in relationships, and enhance inner peace.
Maa Chandraghanta teaches us that strength and serenity go hand in hand. She inspires us to face challenges with courage while maintaining inner peace. Her blessings protect us from negativity, bestowing prosperity, fearlessness, and harmony.
May Maa Chandraghanta’s divine grace guide us all towards courage, wisdom, and peace. Jai Mata Di!
नवरात्रि, देवी दुर्गा को समर्पित पर्व, उनके नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना का अवसर है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो साहस, शांति और दिव्य रक्षा का प्रतीक हैं। वे अपने भक्तों को बल, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं और नकारात्मकता व भय को दूर करती हैं।
मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। उनका नाम चंद्र (आधा चंद्रमा) और घंटा (घंटी) के संयोजन से बना है, क्योंकि उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। वे साहस और शांति का प्रतीक हैं, जो आक्रामकता और शांति के बीच संतुलन बनाए रखती हैं। उनका उग्र रूप बुरी शक्तियों का नाश करता है, जबकि उनका शांत स्वभाव भक्तों को सौभाग्य और शांति प्रदान करता है।
वे भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं, और विवाह के पश्चात उन्होंने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया, जिससे उन्हें चंद्रघंटा कहा जाने लगा। उनका स्वरूप हमें सिखाता है कि साहस और शांति के साथ हम जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है:
मां चंद्रघंटा का संबंध मणिपुर चक्र (सौर जाल चक्र) से है, जो आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और मानसिक शक्ति को नियंत्रित करता है। उनकी पूजा से यह चक्र सक्रिय होता है, जिससे व्यक्ति भय, संकोच और नकारात्मकता से मुक्ति पाकर आत्मबल प्राप्त करता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष विधि से की जाती है:
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः”
मां चंद्रघंटा की सबसे प्रसिद्ध कथा उनके शिव विवाह से संबंधित है। जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की, तो भगवान शिव विवाह के लिए राज़ी हो गए। विवाह के दिन वे अपने गणों के साथ एक भयानक रूप में प्रकट हुए—सिर पर भस्म, गले में नरमुंडों की माला और उनके साथ भयावह जीव-जंतु थे। यह देखकर सभी देवता और पार्वती के परिवारजन भयभीत हो गए।
तब पार्वती ने मां चंद्रघंटा का रूप धारण किया, जिससे चारों ओर दिव्य ऊर्जा का संचार हुआ और शिवजी का उग्र रूप शांत हो गया। इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि धैर्य, साहस और शांति के साथ हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
मां चंद्रघंटा का संबंध शुक्र ग्रह से है, जो प्रेम, सौंदर्य और संतुलन का कारक है। उनकी पूजा से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
मां चंद्रघंटा हमें सिखाती हैं कि साहस और शांति का संतुलन आवश्यक है। वे हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए शक्ति प्रदान करती हैं और जीवन में शांति बनाए रखने का आशीर्वाद देती हैं। उनकी कृपा से हम निडरता, सफलता और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा की कृपा से सभी को शक्ति, साहस और समृद्धि प्राप्त हो। जय माता दी!