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Maa Chandraghanta – The Goddess of Courage and Serenity

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Maa Chandraghanta, worshipped on the third day of Navratri, symbolizes courage, peace, and divine protection. Adorned with a crescent moon on her forehead, she rides a lion, carrying weapons to destroy evil while blessing her devotees with tranquility and prosperity. Her grace removes fear and negativity, empowering devotees with strength and spiritual wisdom.

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Shivam Gangwar 7 min
Apr 01, 2025

Maa Chandraghanta: The Goddess of Courage and Serenity

Navratri, the festival dedicated to Goddess Durga, celebrates her nine divine forms. The third day of Navratri is devoted to Maa Chandraghanta, a powerful yet compassionate goddess who represents courage, grace, and divine protection. She is known to bestow her devotees with strength, peace, and prosperity while eliminating negativity and fear.

Who is Maa Chandraghanta?

Maa Chandraghanta is the third manifestation of Goddess Durga. Her name comes from the half-moon (Chandra) shaped like a bell (Ghanta) on her forehead. She signifies courage and serenity, balancing aggression with peace. While her fierce form destroys evil forces, her calm demeanor blesses devotees with harmony and happiness.

She is the divine consort of Lord Shiva, and after their marriage, she adorned her forehead with the crescent moon, earning her the name Chandraghanta. Her form teaches us that with courage and grace, we can overcome life’s challenges while maintaining inner peace.

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Appearance and Symbolism

Maa Chandraghanta’s divine form is awe-inspiring:

  • She has ten arms, each holding different weapons, signifying her readiness to protect her devotees from all harm.
  • She rides a lion, symbolizing bravery and fearlessness.
  • She carries a trident, mace, bow, and sword, representing power and destruction of evil.
  • Her forehead is adorned with a crescent moon, which radiates a calming aura.
  • She is depicted with a golden complexion, representing divine energy and radiance.
  • Her dual nature signifies that while she is a fierce warrior against negativity, she is also a loving mother who grants peace and prosperity.

Spiritual Significance of Maa Chandraghanta’s Worship

Maa Chandraghanta is associated with the Manipura Chakra (Solar Plexus Chakra), which governs confidence, willpower, and personal strength. Worshiping her activates this chakra, helping devotees overcome fear, self-doubt, and negativity. She blesses them with courage, clarity, and emotional balance.

Rituals and Worship Methods

On the third day of Navratri, devotees perform the following rituals to seek Maa Chandraghanta’s blessings:

  • Kalash Sthapana (Ghata Sthapana) – A sacred pot is placed to invoke the goddess’s presence.
  • Mantra Chanting and Offerings – Devotees offer red flowers, milk, and sweets while reciting the following mantra:

“Om Devi Chandraghantayai Namah”

  • Bhog (Offerings) – She is offered milk and kheer (rice pudding), which symbolize purity and devotion.
  • Fasting and Meditation – Many devotees observe a fast and meditate on her divine form to gain spiritual strength and protection.

Mythological Story of Maa Chandraghanta

After Goddess Parvati’s intense penance, Lord Shiva agreed to marry her. When he arrived at the wedding venue with his followers (Ganas), he appeared in a terrifying form—covered in ashes, with a garland of skulls and wild creatures accompanying him. Seeing this, Parvati transformed into Maa Chandraghanta, radiating divine energy and calming the situation. Her soothing yet commanding presence reassured everyone, ensuring a peaceful wedding.

This story highlights how courage and grace can transform even the most daunting situations into harmonious ones.

Astrological Significance

Maa Chandraghanta governs the planet Venus (Shukra), which influences love, beauty, and harmony. Worshiping her can remove planetary obstacles, bring success in relationships, and enhance inner peace.

Benefits of Worshiping Maa Chandraghanta

  • Removes obstacles, fears, and negative energies.
  • Boosts confidence, strength, and decision-making abilities.
  • Brings peace, prosperity, and emotional balance.
  • Enhances spiritual awakening and positive aura.
  • Improves relationships and harmony in life.

Conclusion

Maa Chandraghanta teaches us that strength and serenity go hand in hand. She inspires us to face challenges with courage while maintaining inner peace. Her blessings protect us from negativity, bestowing prosperity, fearlessness, and harmony.

May Maa Chandraghanta’s divine grace guide us all towards courage, wisdom, and peace. Jai Mata Di!


मां चंद्रघंटा: साहस और शांति की देवी

नवरात्रि, देवी दुर्गा को समर्पित पर्व, उनके नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना का अवसर है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो साहस, शांति और दिव्य रक्षा का प्रतीक हैं। वे अपने भक्तों को बल, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं और नकारात्मकता व भय को दूर करती हैं।

मां चंद्रघंटा कौन हैं?

मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। उनका नाम चंद्र (आधा चंद्रमा) और घंटा (घंटी) के संयोजन से बना है, क्योंकि उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। वे साहस और शांति का प्रतीक हैं, जो आक्रामकता और शांति के बीच संतुलन बनाए रखती हैं। उनका उग्र रूप बुरी शक्तियों का नाश करता है, जबकि उनका शांत स्वभाव भक्तों को सौभाग्य और शांति प्रदान करता है।

वे भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं, और विवाह के पश्चात उन्होंने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया, जिससे उन्हें चंद्रघंटा कहा जाने लगा। उनका स्वरूप हमें सिखाता है कि साहस और शांति के साथ हम जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकते हैं

मां चंद्रघंटा का स्वरूप और प्रतीकात्मकता

मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है:

  • उनके दस हाथ हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं, जो भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहने का संकेत देते हैं।
  • वे सिंह पर सवार हैं, जो साहस और निर्भयता का प्रतीक है।
  • वे त्रिशूल, गदा, धनुष और तलवार धारण किए हुए हैं, जो शक्ति और बुरी शक्तियों के विनाश का संकेत देते हैं।
  • उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, जो शीतलता और आध्यात्मिक आभा का प्रतीक है।
  • उनका स्वर्णिम वर्ण उनकी दिव्य ऊर्जा और तेज को दर्शाता है।
  • उनका यह रूप यह दर्शाता है कि वे एक ओर दुष्ट शक्तियों के संहार के लिए तत्पर हैं, तो दूसरी ओर वे ममतामयी माता हैं, जो अपने भक्तों को शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं

मां चंद्रघंटा की पूजा का आध्यात्मिक महत्व

मां चंद्रघंटा का संबंध मणिपुर चक्र (सौर जाल चक्र) से है, जो आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और मानसिक शक्ति को नियंत्रित करता है। उनकी पूजा से यह चक्र सक्रिय होता है, जिससे व्यक्ति भय, संकोच और नकारात्मकता से मुक्ति पाकर आत्मबल प्राप्त करता है

पूजा विधि और अनुष्ठान

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष विधि से की जाती है:

  • कलश स्थापना (घट स्थापना) – देवी की दिव्य उपस्थिति के लिए कलश स्थापित किया जाता है।
  • मंत्र जाप और अर्पण – भक्त लाल पुष्प, दूध और मिठाई अर्पित करते हैं और निम्नलिखित मंत्र का जाप करते हैं:

“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः”

  • भोग अर्पण – मां चंद्रघंटा को दूध और खीर का भोग अर्पित किया जाता है, जो पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है।
  • व्रत और ध्यान – भक्त व्रत रखते हैं और मां चंद्रघंटा की कृपा पाने के लिए ध्यान करते हैं।

मां चंद्रघंटा से जुड़ी पौराणिक कथा

मां चंद्रघंटा की सबसे प्रसिद्ध कथा उनके शिव विवाह से संबंधित है। जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की, तो भगवान शिव विवाह के लिए राज़ी हो गए। विवाह के दिन वे अपने गणों के साथ एक भयानक रूप में प्रकट हुए—सिर पर भस्म, गले में नरमुंडों की माला और उनके साथ भयावह जीव-जंतु थे। यह देखकर सभी देवता और पार्वती के परिवारजन भयभीत हो गए।

तब पार्वती ने मां चंद्रघंटा का रूप धारण किया, जिससे चारों ओर दिव्य ऊर्जा का संचार हुआ और शिवजी का उग्र रूप शांत हो गया। इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि धैर्य, साहस और शांति के साथ हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है

ज्योतिषीय महत्व

मां चंद्रघंटा का संबंध शुक्र ग्रह से है, जो प्रेम, सौंदर्य और संतुलन का कारक है। उनकी पूजा से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है

मां चंद्रघंटा की आराधना के लाभ

  • भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है।
  • आत्मविश्वास, साहस और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  • शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
  • आध्यात्मिक जागरूकता और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है।

निष्कर्ष

मां चंद्रघंटा हमें सिखाती हैं कि साहस और शांति का संतुलन आवश्यक है। वे हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए शक्ति प्रदान करती हैं और जीवन में शांति बनाए रखने का आशीर्वाद देती हैं। उनकी कृपा से हम निडरता, सफलता और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं

मां चंद्रघंटा की कृपा से सभी को शक्ति, साहस और समृद्धि प्राप्त हो। जय माता दी!


 

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