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A Simple Guide to Observing Navaratri Vratam

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Navaratri is a sacred festival of nine nights dedicated to Goddess Durga, symbolizing devotion, self-discipline, and spiritual purification. Through Sankalpa, mantra chanting, reading Devi scriptures, fasting, and daily Aarti, we seek her divine blessings. This period represents self-transformation, positive energy, and inner growth. Jai Mata Di! 🔱✨

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Shivam Gangwar 6 min
Mar 28, 2025

A Simple Guide to Observing Navaratri Vratam

Navaratri is a sacred period of nine nights dedicated to the divine feminine energy, Devi. It is a time for spiritual purification, devotion, and self-discipline. During these nine nights, Goddess Durga battled the mighty demon Mahishasura, whose strength was so great that even the Devas and Trimurti could not defeat him. On the tenth day, known as Vijaya Dashami, she emerged victorious. By observing Navaratri Vratam, we honor her divine power and seek her blessings.

Taking Sankalpa (Sacred Resolution)

Sankalpa is a solemn vow or commitment to observe the vratam with sincerity and devotion. By taking this vow, we dedicate ourselves to spiritual growth and self-discipline. Here is a simplified meaning of the Sankalpa:

  • Atha Shubha Dine Shubha Muhurte – On this sacred day and auspicious time,
  • Mama Sarvabhishta Siddhyarthe – For the fulfillment of all my desires,
  • Mama Samasta Papakshayarthe – For the destruction of all my sins,
  • Yatha Shakti Aham Navaratri Vratam Karishye – To the best of my ability, I will observe this Navaratri fast.

During the vratam, place a vessel of water along with offerings in your puja room and, on the tenth day, pour the water at the base of a tree and donate the coin to someone in need.

Best Time to Take Sankalpa:

For those in India, the ideal time to take Sankalpa is between 6:00 AM and 12:20 PM. If you reside outside India, consult a local panchangam to determine the appropriate time.

Four Essential Practices for Navaratri Vratam

1. Chanting the Navarna Mantra with Kara Nyasa

Chanting the Navarna Mantra helps connect with Devi’s divine energy. The mantra is:

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे Aing Hring Kling Chamundayai Vichche

Perform Kara Nyasa (hand gesture activation) while chanting:

  • Touch the base of your thumb – Om Aing Angushthabhyam Namah
  • Touch index fingers – Om Hring Tarjanibhyam Namah
  • Touch middle fingers – Om Kling Madhyamabhyam Namah
  • Touch ring fingers – Om Chamundayai Anamikabhyam Namah
  • Touch little fingers – Om Vichche Kanishtikabhyam Namah
  • Touch the palms – Om Aing Hring Kling Chamundayai Vichche Karatalakaraprishthabhyam Namah

Additionally, recite one Devi Stotra such as Argala Stotra, Siddha Kunjika Stotra, Devi Suktam, or Mahishasura Mardini Stotra.

2. Reading Devi Scriptures

Immerse yourself in Devi’s wisdom by reading sacred texts like Devi Bhagavatam, Devi Mahatmyam, or any scripture that glorifies her divine power.

3. Practicing Brahmacharya and Fasting

Brahmacharya means self-discipline, not just celibacy. During Navaratri:

Maintain purity in thoughts and actions.

Observe fasting. If a full fast is difficult, eat only one or two simple meals a day.

Consume sattvic food like rice and moong dal boiled in milk and ghee (Havishyanam).

Avoid heavy spices, onion, and garlic.

4. Performing Daily Devi Aarti

Worship Devi’s idol or image daily with devotion. If an idol is unavailable, you may install a Kalasha (sacred water pot) along with a Devi Yantra. However, Kalasha Sthapana is not mandatory.

Simplified Yantra for Navaratri

The Devi Bhagavatam recommends placing a Devi Yantra along with Kalasha. While drawing the traditional Yantra requires deep study, a simple form can be drawn on paper or with rice flour near the Kalasha. The essential part is writing the nine syllables of the Navarna Mantra in sequence.

Conclusion

Navaratri is a time of devotion, inner reflection, and spiritual growth. Rather than focusing on rituals' technicalities, immerse yourself in Devi’s energy through chanting, reading, fasting, and prayer. The true essence of Navaratri is surrendering to the divine and embracing her supreme power in our lives. Jai Mata Di!


नवरात्रि व्रत पालन करने के लिए सरल मार्गदर्शिका

नवरात्रि नौ रातों की एक पवित्र अवधि है जो देवी की दिव्य स्त्री ऊर्जा को समर्पित है। यह आत्मशुद्धि, भक्ति और आत्म-अनुशासन का समय होता है। इन नौ रातों के दौरान, माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक दानव से युद्ध किया, जिसकी शक्ति इतनी प्रबल थी कि देवता और त्रिदेव भी उसे पराजित नहीं कर सके। दसवें दिन, जिसे विजयादशमी कहा जाता है, माँ दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की। नवरात्रि व्रत का पालन करके, हम उनकी दिव्य शक्ति का सम्मान करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

संकल्प (पवित्र संकल्प) लेना

संकल्प एक पवित्र प्रतिज्ञा या संकल्प होता है, जिसे हम श्रद्धा और समर्पण के साथ लेते हैं। इसे ग्रहण करके, हम आध्यात्मिक विकास और आत्म-अनुशासन के लिए खुद को समर्पित करते हैं। संकल्प का एक सरल अर्थ इस प्रकार है:

  • अथ शुभ दिने शुभ मुहूर्ते – इस पवित्र दिन और शुभ मुहूर्त में,
  • मम सर्वाभीष्ट सिद्ध्यर्थे – मेरे समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए,
  • मम समस्त पापक्षयार्थे – मेरे सभी पापों के नाश के लिए,
  • यथा शक्ति अहम् नवरात्रि व्रतम् करिष्ये – अपनी पूरी क्षमता के अनुसार, मैं इस नवरात्रि व्रत का पालन करूंगा।

व्रत के दौरान, पूजाघर में जल से भरा एक पात्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। दसवें दिन, इस जल को किसी वृक्ष के मूल में अर्पित करें और व्रत में रखे गए सिक्के को किसी जरूरतमंद को दान दें।

संकल्प लेने का सर्वोत्तम समय

भारत में रहने वालों के लिए, संकल्प लेने का सबसे शुभ समय सुबह 6:00 बजे से 12:20 बजे के बीच होता है। यदि आप भारत के बाहर रहते हैं, तो अपने स्थानीय पंचांग से सही मुहूर्त की जानकारी लें।

नवरात्रि व्रत के चार प्रमुख नियम

1. नवर्ण मंत्र का जाप और कर-न्यास

नवर्ण मंत्र का जाप देवी की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने में सहायता करता है। यह मंत्र इस प्रकार है:

ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
Aing Hring Kling Chamundayai Vichche

मंत्र का जाप करते हुए कर-न्यास (हस्त मुद्रा सक्रियता) करें:

  • अंगूठे के मूल पर स्पर्श करेंॐ ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
  • तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) पर स्पर्श करेंॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः
  • मध्यमा (मिडिल फिंगर) पर स्पर्श करेंॐ क्लीं मध्यमाभ्यां नमः
  • अनामिका (रिंग फिंगर) पर स्पर्श करेंॐ चामुण्डायै अनामिकाभ्यां नमः
  • कनिष्ठा (लिटिल फिंगर) पर स्पर्श करेंॐ विच्चे कनिष्ठिकाभ्यां नमः
  • दोनों हथेलियों पर स्पर्श करेंॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः

इसके अतिरिक्त, कोई एक देवी स्तोत्र अवश्य पढ़ें, जैसे:
अर्गला स्तोत्र, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र, देवी सूक्तम, या महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र।

2. देवी ग्रंथों का पाठ

माँ देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए, पवित्र शास्त्रों का अध्ययन करें। कुछ महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं:

देवी भागवत पुराण

देवी महात्म्यम् (दुर्गा सप्तशती)

अन्य कोई भी देवी संबंधी शास्त्र

3. ब्रह्मचर्य का पालन और उपवास

ब्रह्मचर्य केवल संयम का नाम नहीं है, बल्कि विचारों और कर्मों की पवित्रता को बनाए रखना भी इसमें शामिल है। नवरात्रि के दौरान:

शुद्ध विचारों और कर्मों को अपनाएँ।

उपवास रखें – यदि पूर्ण उपवास कठिन हो, तो दिन में एक या दो बार ही सात्त्विक भोजन करें।

सात्त्विक आहार ग्रहण करें, जैसे चावल और मूंग दाल को दूध और घी में पकाकर (हविष्यनं)।

तेज मसाले, प्याज और लहसुन से बचें।

4. प्रतिदिन देवी की आरती करें

माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष नित्य पूजा करें। यदि प्रतिमा उपलब्ध न हो, तो कलश (संपूर्णता का प्रतीक जल पात्र) स्थापित करें और एक देवी यंत्र के साथ पूजा करें। हालाँकि, कलश स्थापना अनिवार्य नहीं है

नवरात्रि के लिए सरल यंत्र

देवी भागवत महापुराण में देवी यंत्र और कलश स्थापना का उल्लेख किया गया है। पारंपरिक यंत्र को बनाने के लिए गहन अध्ययन की आवश्यकता होती है, लेकिन एक सरल यंत्र चावल के आटे या कागज पर बनाकर, कलश के पास स्थापित किया जा सकता है।

इसमें नवर्ण मंत्र के नौ अक्षरों को क्रमबद्ध रूप से लिखना महत्वपूर्ण होता है।

निष्कर्ष

नवरात्रि भक्ति, आत्म-निरीक्षण और आध्यात्मिक उत्थान का समय है। विधियों की जटिलता में न उलझकर, माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप, शास्त्र पाठ, उपवास और प्रार्थना करें।

नवरात्रि का असली अर्थ है दिव्यता के प्रति पूर्ण समर्पण और माँ दुर्गा की शक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करना।

जय माता दी! 🙏

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